बर्मिंगम भारत को रविवार को इंग्लैंड के खिलाफ 31 रनों की हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही अब इस वर्ल्ड कप में कोई टीम ऐसी नहीं है जिसका सफर अजेय रहा हो। हालांकि, अब तक हुए 11 वर्ल्ड कप में 5 बार ऐसा हुआ है जब विजेता टीमों का पूरे टूर्नमेंट में सफर अजेय रहा। वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया ने नाम यह रेकॉर्ड 2 बार दर्ज हुआ है और एक बार 1996 वर्ल्ड कप विजेता टीम श्रीलंका के नाम रेकॉर्ड दर्ज है। इन तीनों ही टीम के नाम यह रेकॉर्ड दर्ज है कि पूरे टूर्नमेंट के दौरान इन्होंने लीग मैच, सुपर 6, सुपर 8, सेमीफाइनल और फाइनल तक सिर्फ जीत ही दर्ज की। अब तक हुए वर्ल्ड कप टूर्नमेंट में विजेता रही टीमों का सफर ऐसा रहा.... 1975: चैंपियन वेस्ट इंडीज- ग्रुप स्टेज में 3 में से 3 मैच जीते फिर सेमीफाइनल और फाइनल में जीत दर्ज कर वर्ल्ड कप उठाया। 1979: चैंपियन वेस्ट इंडीज- ग्रुप स्टेज पर 3 में से 2 मैच जीते, 1 मैच बेनतजी ही रहा फिर सेमीफाइनल और फाइनल में जीत कर बने विजेता। 1983: भारतीय टीम विजेता जरूर बनी थी, लेकिन ग्रुप स्टेज पर 6 में से 4 ही मैच जीते थे। हालांकि, सेमीफाइनल और फाइनल जीतकर कपिलदेव की अगुआई वाली टीम ने इतिहास जरूर बनाया। 1987: चैंपियन बनी ऑस्ट्रेलिया की टीम ने ग्रुप स्टेज पर 6 में से 5 मैच जीते। सेमीफाइनल और फाइनल जीत कर वर्ल्ड कप जरूर उठाया। पढ़ें: 1992: चैंपियन रही पाकिस्तान की टीम ग्रुप मैच में 8 में से सिर्फ 4 मैच ही जीत पाई थी, एक मैच बेनतीजा रहा। हालांकि, इमरान खान की कप्तानी में अंडरडॉग मानी जा रही टीम ने सेमीफाइनल और फाइनल में दमदार प्रदर्शन किया। 1996: चैंपियन रही श्रीलंका की टीम ने ग्रुप मैच में 5 में से 5 मुकाबले जीते (2 मैच रद्द हो गए) और फिर क्वॉर्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में अर्जुन रणतुंगा की नेतृत्व में जीत दर्ज की। 1999: चैंपियन रही ऑस्ट्रेलिया की टीम ने ग्रुप स्टेज पर 5 में से 3 मैच जीते, सुपर सिक्स में जीत दर्ज की। सेमीफाइनल टाई रहा और ऑस्ट्रेलिया को विजेता घोषित किया गया और इसके बाद फाइनल जीतकर इतिहास बनाया। 2003: चैंपियन रही ऑस्ट्रेलिया की टीम ने ग्रुप स्टेज पर 6 में से 6 मैच जीते, सुपर सिक्स में 3 में से 3 मैच जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। रिकी पॉन्टिंग की अगुआई में फाइनल जीतकर इतिहास बनाया। 2007: एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के टीम का सफर अजेय रहा। ग्रुप स्टेज पर 3 में से 3 मैच जीते और फिर सुपर 8 में भी अजेय सफर जारी रहा और वर्ल्ड कप लगातार तीसरी बार उठाया। 2011: चैंपियन रही भारत की टीम ने ग्रुप स्टेज पर 6 में 4 मैच जीते, 1 में हार मिली और 1 मैच टाई रहा। हालांकि, महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में टीम ने क्वॉर्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में जीत दर्ज की। 2015: चैंपियन रही ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 6 में से 4 मैच जीते और एक मैच बेनतीजा रहा। कंगाररू सेना ने आगे क्वॉर्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में अपना अजेय रथ जारी रखकर जीत दर्ज की। देखें: टीम इंडिया की उम्मीदें अभी बरकरार हैं विराट कोहली भले ही क्लाइव लॉयड (वेस्ट इंडीज), अर्जुन रणतुंगा (श्रीलंका) और रिकी पॉन्टिंग (ऑस्ट्रेलिया) की लीग में शामिल न हो सके हों, लेकिन टीम इंडिया के लिए अभी उम्मीदें बरकरार हैं। अब भारत ने 2 बार वर्ल्ड कप ट्रोफी उठाई है और दोनों ही बार भारत का सफर पूरे टूर्नमेंट में अजेय नहीं रहा। 1983 में टीम इंडिया को दो बार टूर्नमेंट में हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज के खिलाफ टीम इंडिया को हार मिली। दूसरी तरफ 2011 में साउथ अफ्रीका से भारतीय टीम को हार मिली और इंग्लैंड के साथ मैच बेनतीजा ही रहा। इस वर्ल्ड में पहली हार के बाद ऐसे हैं समीकरण 2011 में साउथ अफ्रीका से हारने के बाद रविवार को इंग्लैंड से मिली हार लीग मुकाबलों में भारत की सिर्फ दूसरी हार है। 2011 से अब तक वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने लीग मैच में लगातार 12 मैच जीते हैं। अब भारत को सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले 2 मैच और खेलने हैं। दोनों ही मैच टीम इंडिया के मुकाबले कमजोर मानी जानेवाली श्रीलंका और बांग्लादेश की टीम के साथ है। फिलहाल कोहली ऐंड कंपनी का फोकस सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की करने पर ही है।
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इंग्लैंड से हार, कोहली चूके पॉन्टिंग की बराबरी से
Reviewed by Ajay Sharma
on
July 01, 2019
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