नई दिल्ली हर्ष जब 9 साल के थे, तब उनकी दादी उन्हें एक दफा मुनिरका गांव स्थित बाबा गंगनाथ अकैडमी में ले गईं। हर्ष को यह जगह इतनी रास आई कि वह आज 7 साल बाद भी यहां से अलग नहीं हुए हैं। हर्ष जल्द ही अपनी प्रतिभा से कोच के पसंदीदा खिलाड़ी बन गए। वह किसी भी नैशनल या इंटरनैशनल टूर्नमेंट से खाली हाथ वापस नहीं आते। 16 साल के हर्ष एशियन गेम्स सिल्वर मेडलिस्ट को अपना रोल मॉडल मानते हैं। वह 60 किग्रा वजन वर्ग में खेलते हैं। ऐसा है ट्रेनिंग शेड्यूलसुबह 6 से 8 बजे तक जिम करना। 11 बजे से 2 बजे तक टेक्निक प्रैक्टिस और पावर, स्ट्रेंथ और स्टेमिना की प्रैक्टिस। फिर शाम को 6 से 10 बजे तक चार कक्षाएं लगती हैं उसमें जूडो, गिरना-पड़ना, थ्रोइंग (ऊपर से उठाकर पटकना), फाइट इत्यादि करवाई जाती है। इसके अलावा बच्चों के बीच आपस में फाइट करवाई जाती है। जो बच्चे अच्छा करते हैं उन्हें उनसे ज्यादा वेट वाले बच्चों के साथ प्रैक्टिस कराई जाती है। कोच की राय हर्ष के कोच समुंदर टोकस कहते हैं कि उनकी लगन और मेहनत जरूर उसे एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी। कोच ने कहा, 'हर्ष में सीखने की जबर्दस्त ललक है। कुछ बच्चे ऐसे हैं जो प्रैक्टिस के बाद घर चले जाते हैं लेकिन हर्ष दूसरे बच्चों को भी गौर से प्रैक्टिस करते देखते रहते हैं। यही वजह है कि आज वह बाकियों से काफी आगे निकल चुके हैं। उपलब्धियां • बाली में आयोजित बाली ओपन जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड • महाराष्ट्र में आयोजित खेलो इंडिया में ब्रॉन्ज मेडल • गुजरात में आयोजित स्कूल नैशनल में सिल्वर मेडल • दिल्ली में आयोजित अंडर-14 स्कूल नैशनल में गोल्ड • तमिलनाडु में आयोजित सब जूनियर में ब्रॉन्ज मेडल • औरंगाबाद में आयोजित सीनियर नैशनल में गोल्ड
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राइजिंग स्टार: जूडो कुराश के हर्ष, 9 साल की उम्र से ट्रेनिंग
Reviewed by Ajay Sharma
on
June 23, 2019
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